गणेश इतने बुद्धिमान क्यों हैं, जाने सद्गुरु से

भारतीय धर्म और संस्कृति में कोई भी शुभ कार्य हो, भगवान श्री गणेश की पूजा के बिना वो कार्य अधूरी मानी जाती है| किसी भी शुभ और मंगल कार्य से पहले भगवान श्री गणेश की पूजा और उनकी स्तुति की जाती है इतना ही नहीं जब भी हम पूजा करने बैठते हैं तो सबसे पहले हम भगवान गणेश की ही पूजा करते हैं ऐसा केवल इसीलिए क्योंकि वह सबसे बुद्धिमान देवता है और इसके पीछे एक बहुत प्रसिद्ध कहानी भी है हाल ही में मानसरोवर का महत्व बताते हुए, सद्गुरु ने भगवान श्री गणेश का भी जिक्र किया| जिसमें उन्होंने बताया कि गणेश इतने बुद्धिमान क्यों है| हमसे जुड़े मुझे दवाओं

मानसरोवर का महत्व और गणपति से संबंध?

गणेश 2

मानसरोवर का महत्व बताते हुए सद्गुरु कहते हैं “तो मानसरोवर बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है शिव थोड़े घुमक्कड़ किस्मके ग्रहस्त हैं, वो दूर निकल जाते हैं, तो उनकी पत्नी पार्वती कैलाश में रहने की बजाय वह यहां नीचे आ जाती हैं क्योंकि वहां सब बर्फ ही बर्फ है. वह यहां नीचे आ जाती हैं यहां कम से कम ठंडा पानी तो है. पार्वती ज़्यादातर यहीं रहती हैं. तो कैलाश के बजाय मान सरोवर में ज़्यादा समय बीता इसलिए यहां कई चीज़ें हुईं. उनमें से एक चीज़ यह हुई कि गणपति का जन्म यहां हुआ.” हमसे जुड़े मुझे दवाओं

गणपति और शिव का संबंध?

“तो उनका सिर हाथी का नहीं है, वो गणपति है. गण मतलब वो गण जो शिव के साथी है. आमतौर पर उनकी व्याख्या विकृत और विक्षिप्तइंसानों की तरह की जाती है या जीव, इंसान नहीं, उनका रूप इंसानों जैसा नहीं है. अजीबो-गरीब रूप है और उनके हाथ पैर ऐसे थे जिनमें हड्डिया नहीं थी. बिना हड्डियों वाले हाथ पैर और वह ऐसी बोली बोलते थे जो कोई और नहीं समझ सका. वह बोलते तो बेसुरा कोलाहल होता था और लगता था कि वह हमेशा मदहोश रहते थे या कम से कम वह ऐसा बर्ताव करते थे. तो उन्हें गण पुकारा गया और वो शिव के परमानेंट साथी थे, हर समय उनके साथ रहते थे दूसरे आए और गए पर वो हमेशा वहीं रहे|” हमसे जुड़े मुझे दवाओं

गणपति का जन्म कैसे हुआ?

गणेश 1

“तो ऐसी ही एक यात्रा पर शिव निकले, तो वो बारह साल के लिए चले गए. इसके हम कई सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण बताते हैं कि वो क्यों बारह साल के लिए गए? क्योंकि ज़्यादातर जब भी वो गए वो बारह साल के लिए गए. तो एक बार जब वो गए हुए थे और जब वो ग्यारह-बारह साल बाद वापस लौटे. पार्वती झील के किनारे बैठी हैं. अकेली स्त्री मानसरोवर के तट पर बैठी हैं और वहाँ कुछ भी नहीं है, उनको एक बच्चा चाहिए. वो एक बच्चे को जन्म नहीं दे पा रही हैं क्योंकि शिव का बीज मानव नहीं है. तो यह साफ है कि उनका बच्चा नहीं हो सकता. पर जब वह शिव के साथ होती है तब वह ठीक रहती है, जब वह लंबे समय के लिए चले जाते, उनकी ममता जाग उठी और उनको एक बच्चा चाहिए, तो एक दिन उन्होंने अपने पूरे शरीर पर चंदन का लेप लगाया. कुछ समय इंतज़ार किया और फिर धीरे-धीरे उस पूरे लेप को निकाल दिया. जब आप ऐसा करते हैं तो कुछ मात्रा में आपकी त्वचा या उसकी कोशिकाएं साथ में आ जाती हैं. इसका उपयोग करके और अपनी तांत्रिक शक्तियों से उन्होंने उसे एक बच्चे का आकार देकर उसमें जान फूँक दी| एक सुंदर सा छोटा बच्चा आ गया और उसका साथ पाकर वह बहुत खुश हुई और वह बड़ा हो गया. वह बस दो ही थे और कोई नहीं था. और शिव कहीं से आकर land हुए, कोई नहीं जानता वो कहाँ जाते हैं, वो और उनके साथी भी land हुए, सब के सब मदहोश और आनंद में थे| शिव अपनी पत्नी से मिलने आ रहे हैं वो उस तरह के हैं. और यहाँ पार्वती को स्नान करना था. तो उन्होंने एक छोटी सी आड़ बनाकर लड़के से कहा कि देखना इस तरफ कोई ना आए” हमसे जुड़े मुझे दवाओं

शिव और गणेश की लड़ाई?

गणेश

“तो बच्चे ने इस कर्तव्य को बड़े ही गर्व से स्वीकार किया, उनको अपनी मां की रखवाली करने में बड़ा गर्व हैं. वह हाथ में भाला लिए हुए इधर से उधर घूम रहे हैं. वो चाहते हैं कोई दिक्कत खड़ी हो, उनको यही चाहिए कि कोई आजाए और वो उसको वहां से … डालें. वो बड़ी बेसब्री के साथ अपनी माँ के लिए कुछ करना चाहते हैं, वो उस अवस्था में है, और अब शिव और उनके साथी यहाँ पहुंचे. तो उनको अपनी पत्नी से मिलना है, वो इसी तरफ चले आ रहे हैं. और लड़के ने उन्हें रोक दिया और पुछा आप कौन हैं? शिव ने कहा तुम, तुम मुझसे पुछ रहे हो, मैं कौन हूँ? और अपनी तलवार के एक झटके से उन्होंने लड़के की गर्दन उतार दी| और पर्वती से मिलने चले गए. अपनी पत्नी को बारह साल बाद देख कर वह बहुत खुश थे पर पत्नी ने जब तलवार पर खून देखा और वह चिल्लाई और उन पर आतिशबाजी हुई. अब उन्हें नहीं पता था कि क्या करें? उन्हें लगा बारह साल बाद उनका भव्य स्वागत होगा. यहां वो उन पर चिलाए जा रही है.” हमसे जुड़े मुझे दवाओं

गणेश कैसे बने गणपति?

“पार्वती ने कहा आपको उसे वापस जीवित करना पड़ेगा. शिव बोले यह संभव नहीं है. उसका सिर धड़ से अलग हो चुका है वह खत्म हो चुका है. पार्वती बोली मैं नहीं जानती कि क्या हुआ है मुझे वो बस ज़िंदा चाहिए. अब अगर उन्हें अपनी पत्नी चाहिए तो उन्हें इस बच्चे को वापस जीवित करना ही पड़ेगा. .तो उन्होंने आसपास देखा और गणों के लीडर को देखा उन्होंने उससे पुछा क्या? उसने कहा ठीक है. तो उन्होंने उसका सिर काटकर लड़के पर लगा दिया. यह पहला head transplant था. तो अब बच्चे का शरीर इंसान का है और सिर एक गण का, वह भी गण के प्रमुख का सिर और उसका एक अंग है जिसमें हड्डी नहीं है. बिना हड्डी का एक अंग तो वो गणपति वन गए” हमसे जुड़े मुझे दवाओं

गणेश इतने बुद्धिमान क्यों है?

उन्हें एक ऐसा सिर मिला जो इंसानका नहीं था इसलिए वो अत्यधिक प्रतिभाशाली थे. इस बेहद तीव्र बुद्धिमत्ता के कारण उन्होंने कभी भी किसी चीज़ को अपने जीवन में बाधा नहीं बनने दिया| जीवन की हर बाधा दूर हो सकती है अगर आपके पास पर्याप्त बुद्धि है, उन्होंने यही सिद्ध करके दिखाया है अगर आप उनके शास्त्रों को लिखने के बारे में नहीं जानते तो उन्होंने व्यास से बोला था कि आपका बोलना बंद नहीं होना चाहिए अगर आप रुक गए तो मैं कलम छोड़ कर चला जाऊंगा. गणेश चतुर्थी का मतलब अपनी तोंद को बढ़ाना नहीं है बल्कि अपनी बुद्धि को बढ़ाना है क्योंकि वो अपनी बुद्धि के लिए ही जाने जाते हैं ना कि अपनी तोंद के लिए| हमसे जुड़े मुझे दवाओं

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