Supreme Court : सरकार और Supreme Court के बीच फिर कुछ ऐसा हुआ कि जिससे खींच गई तलवार

Supreme Court : सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच कुछ ऐसा हुआ है जिससे खींच गई है तलवारें, जजों की नियुक्ति के लिए बने कॉलेजियम ने जज बनाने और जजों के ट्रांसफर के लिए सिफारिशें की लेकिन सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया सुप्रीम कोर्ट को यह सब कुछ अच्छा नहीं लगा और कह दिया कि इससे अच्छा इंप्रेशन नहीं जा रहा है 17 अक्टूबर को कॉलेजियम ने पांच वकीलों को जज बनाने के लिए सरकार को सिफारिश भेजी थी दो सीनियर सिख वकील हरमीत सिंह ग्रेवाल और दीपेंद्र सिंह नलवा को जज बनाने की भी सिफारिशें थी 

सरकार की तरफ से सिख नामों को मंजूर नहीं 

2 नवंबर को सरकार ने सिख नामों को मंजूर नहीं किया जबकि तीन अन्य वकीलों को जज बनाने की सिफारिश मान ली और सरकार ने इन दो जज को मंजूरी न देने की कोई कारण भी नहीं बताया | सुप्रीम कोर्ट के दो जज जस्टिस संजय केशन और सुधांशु धुलिया को सरकार की पिक एंड चूज पॉलिसी अच्छी नहीं लगी 

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के वकील और अटॉर्नी जनरल को कहा?

अटॉर्नी जनरल आर के वेंकट रमनी को कोर्ट ने सुना दिया की इससे अच्छा संदेश नहीं जाता सरकार कुछ नाम चुन लेती है कुछ छोड़ देती है हमारे कहने पर भी अक्सर ऐसा हो रहा है जस्टिस कशन कॉल उस कॉलेजियम के सदस्य हैं जो जज बनाने या ट्रांसफर की सिफारिश करती है चीफ जस्टिस के नाते ही डीवाई चंद्रचूड़ कॉलेजियम को हेड करते हैं 

Supreme Court ने क्यों नाराजगी जताई? 

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी की वजह यह भी है कि कॉलेजियम ने 11 जजों के नाम ट्रांसफर के लिए दिए थे सरकार ने पांच जजों के ट्रांसफर को मंजूर कर लिया लेकिन छह नाम अभी तक लटके हैं अटॉर्नी जनरल ने कहा कि चुनाव के सीजन के चलते समय लग रहा है सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं लगी हैं जिसमें शिकायत की गई है कि जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर के लिए कॉलेजियम में की सिफारिश को मंजूरी देने में सरकार देरी कर रही है 7 नवंबर को भी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह परेशान करने वाली बात है कि सरकार कॉलेजियम की सिफारिश पर सिलेक्टिव जजों को नियुक्त कर रही है सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला इसलिए आया क्योंकि कानून मंत्रालय ने अप्रैल 2021 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर कॉलेजियम ने आम सहमति से जज बनाने की सिफारिश की तो सरकार को जजों की नियुक्ति तीन से चार हफ्ते में करनी होगी इस समय भी सरकार के पास कॉलेजियम की कुल 14 सिफारिशें पेंडिंग हैं जो जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर से जुड़ी है और यही कारण है कि अब सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच में यह टकराव देखने को मिला है सरकार नहीं चाहती कि जज के मामले में सब कुछ कॉलेजियम करें 2014 में सरकार ने नेशनल जुडिशियस अपॉइंटमेंट कमीशन यानी NJAC बनाया जिसमें छह लोग, चीफ जस्टिस, कानून मंत्री, दो सुप्रीम कोर्ट के जज और दो एक्सपर्ट को जजों पर फैसला लेने थे दो एक्सपर्ट पीएम विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस को चुनना था 

2015 में जज के ट्रांसफर और नियुक्ति के लिए संसद को मिला अधिकार 

संसद को भी अधिकार दिए गए कि वह जज से जुड़े मामलों में दखल दे सकता है 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान की मूल भावना के खिलाफ मानकर NJAC को रद्द कर दिया था कॉलेजियम पर सरकार और सुप्रीम कोर्ट की टकराव पुरानी है पुराने कानून मंत्री किरण रिज्जू के वक्त टकराव चरम पर था क्योंकि किरण रिज्जू ना केवल कॉलेजियम सिस्टम के खिलाफ थे बल्कि कॉलेजियम सिस्टम को एलियन सिस्टम कहते थे कॉलेजियम सिस्टम का संविधान में भी जिक्र नहीं है जब किरण रिजिजू का कानून मंत्रालय से ट्रांसफर हुआ तब यही माना गया कि सरकार नहीं चाहती कि सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच किसी तरह का टकराव हो देश और दुनिया की हर खबर के लिए आप हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन कर लीजिए JOIN NOW

Leave a Comment