India-china : भारत से दोस्ती के लिए श्रीलंका ने चीन को दिया चकमा, श्रीलंका ने चीन के खिलाफ लिया एक्शन

India-china : पावर किसे कहते हैं वह कोई भारत से सीखें क्योंकि आज भारत वह देश बन चुका है जिससे दोस्ती करने के लिए दुनिया के कई देश एक के बाद एक ऑफर और ना जाने क्या-क्या कर रहे हैं फिर चाहे वह भारत के मित्र देश रूस, इजराइल, अमेरिका हो या फिर दुश्मन देश चीन यह सारे देश भारत के साथ व्यापार करने में लगे हैं और इसी कड़ी में भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका ने चीन को बड़ा झटका देते हुए भारत के हित में एक बड़ा फैसला करने जा रहा है 

जासूसी जहाजों के संचालन पर 12 महीने की रोक

श्रीलंका अपने समुद्री क्षेत्र में विदेशी जासूसी जहाजों के संचालन पर 12 महीने की रोक लगाएगा यानी चीन के रिसर्च और स्पाई यानी जासूसी जहाज अब पहले की तरह श्रीलंका के बंदरगाहों पर नहीं रुक पाएंगी. Economic Time ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि श्रीलंका यह फैसला चीन के रिसर्च और जासूसी जहाजों को अपने बंदरगाहों पर रोकने के लिए कर रहा है श्रीलंका के एक वरिष्ठ मंत्री ने स्थानीय अखबार The Daily Morning से बात करते हुए कहा है कि सरकार श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र में विदेशी रिसर्च जहाजों पर एक साल की रोक लगाने पर विचार कर रही है इन जहाजों का आना गंभीर राजनयिक तनाव पैदा करता है 2024 में चुनाव भी होने वाले हैं इस तरह के जहाजों का आना क्षेत्र और श्रीलंका के लिए बेहद विघटनकारी हो सकता है क्योंकि सरकार दबाव में आ सकती है इसलिए हम विचार कर रहे हैं कि इन पर एक साल या उससे भी अधिक समय के लिए रोक लगाया जाएगा 

साल 2024 में श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं 

भारत श्रीलंकाई तटों पर चीनी जहाजों के रुकने पर आपत्ति जताता रहा है इस वजह से दोनों देश के बीच राजनयिक तनाव भी देखने को मिलता है रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपने समुद्री वैज्ञानिक अनुसंधान जहाज को 2024 की शुरुआत तक श्रीलंकाई बंदरगाहों पर खड़ा करना चाहता था इसे लेकर भारत ने आपत्ति जताई थी जिसे देखते हुए श्रीलंकाई पक्ष ने यह फैसला लिया है श्रीलंका 2024 के राष्ट्रपति चुनावों से पहले भारत और चीन दोनों ही देशों को खुश करने या नाराज करने से बच रहा है देश के विदेश मंत्री अली साबरी ने कहा है कि श्रीलंका अगले 12 महीने तक अपने समुद्री रिसर्च क्षमताओं का विकास करेगा ताकि भविष्य के विदेशी रिसर्च अभियानों में समान भागीदार के रूप में हिस्सा ले सके 

भारत ने जताया था आपत्ति 

श्रीलंका के समाचार आउटलेट डेली मिरर ने उनके हवाले से कहा हम 12 महीनों तक अपनी क्षमता में विकास करेंगे ताकि हम विदेशी रिसर्च गतिविधियों में समान रूप से भाग ले सके इसी साल अक्टूबर में श्रीलंका ने चीन के खोजी जहाज शिंग यान 6 को अपने एक बंदरगाह पर रुकने और रिसर्च करने की अनुमति दी थी चीन इस तरह के रिसर्च जहाजों जिसे जासूसी जहाज कहा जाता है का खूब इस्तेमाल करता है चीन इन जहाजों के जरिए श्रीलंका से लगे दक्षिण भारत में रणनीतिक प्रतिष्ठानों की जासूसी और मन्नार की खाड़ी में खनिजों की जानकारी जमा करता है खैर श्रीलंका की आंखें अब जाकर खुली है और उसने यह कड़ा फैसला लिया है श्रीलंका के इस फैसले पर आपका क्या कुछ कहना है कमेंट करके जरूर बताएं 

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