Parker Solar Probe on Sun: NASA का स्पेसक्राफ्ट सूरज पर जाकर भी क्यों नहीं पिघला

Parker Solar Probe on Sun: सूर्य की गर्मी दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए हमेशा से ही रहस्यों से भरी रही है और वैज्ञानिक कई सालों से इसकी research में जुटे हुए हैं मगर पृथ्वी के नज़दीक ये सितारा हमेशा से ही वैज्ञानिकों को हैरान करता आया है. सूर्य वैसे तो gas से बना गोला है जो लगातार अंतरिक्ष में आग उगल रहा है, मगर आज से करीब तीन साल पहले एक अंतरिक्ष यान पृथ्वी से निकला था, जिसकी मंज़िल थी सूरज. इस अंतरिक्ष यान को सूरज पर जाकर कई ऐसे राज पता लगाने थे जिनके बारे में वैज्ञानिकों को भनक तक नहीं थी और इसलिए इस अंतरिक्ष मुसाफिर ने सूरज पर जाने की ठान लिया. उस अंतरिक्ष यान का नाम पार्कर solar probe था. मुझे दबाओ

Parker Solar Probe की सफलता जान, हो जाएंगे हैरान

वैज्ञानिकों की मानें तो पार्कर solar probe ने कुछ ऐसा कारनामा दिखाया है जो हम इंसान कभी सोच भी नहीं सकते थे. दरअसल अंतरिक्ष यान सूरज पर पहुंच चुका है. आपने बिल्कुल सही सुना सौर मंडल के सभी ग्रहों को छोड़यह अंतरिक्ष यान बिल्कुल सूरज के नज़दीक पहुंच चुका है.आपको पता ही होगा कि सूरज कितना गर्म है. लेकिन यह अंतरिक्ष यान सूरज के corona वाले area में घुस गया है. तो चलिए जानते हैं कि आखिर यह मुसाफिर सूरज के इतना नज़दीक क्यों गया और सूरज के नज़दीक जलती हुई गर्मी को आखिर कैसे सहन कर ली और इसने इतने नज़दीक जाकर वहां पर क्या देखा? तो चलिए आपको आज ले चलते हैं सूरज के भयानक दुनिया की सैर में| मुझे दबाओ

Parker Solar Probe को सूरज पर क्यों भेजा गया

Parker Solar Probe on Sun 1

साथियों एक दौर था जब हम केवल सूरज को आसमान में देखते थे लेकिन आज वह दिन आ गया है जब हम इंसानों ने सूरज पर भी अपने अंतरिक्ष यान को भेजना शुरू कर दिया है. सूरज की वजह से ही आज हम पृथ्वी पर ज़िंदा है. इसकी वजह से ही पृथ्वी पर जीवन की प्रक्रिया हो पाती है, इसलिए यह सवाल तो लाज़मी है कि सूरज को पूर्ण रूप से जानना हमारे लिए कितना ज़रूरी है. पार्कर solar probe के जाने से पहले हम ने सूरज को केवल दूर से ही study किया था. मगर वैज्ञानिकों की मेहनत से हमने इस आगके गोले को भी छू लिया है. सबसे पहले हम इस बात पर नज़र डालते हैं कि आखिर सूरज के आसपास ऐसा क्या है जो इस अंतरिक्षयान को नज़दीक जाने से मुश्किल बनाता है. मुझे दबाओ

आखिर सूरज पर जाना इतना मुश्किल क्यों है

जिस प्रकार पृथ्वी ठोस होता है, उस तरह से सूरज के पास कोई ठोस सतह नहीं है. बल्कि आग उगलता गोला कई तरह के solar material से मिलकर बना हुआ है और सूरज का जो बाहरी आवरण है वे भी बहुत ही ज़्यादा गर्म है. लेकिन वैज्ञानिकों ने इतना गर्म होते हुए भी सूरज पर अंतरिक्ष यान भेज दिया. सूरज की प्रचंड गर्मी उसका gravity force और solar wind साथ ही सूरज पर उठने वाले आग के तूफान जो किसी भी अंतरिक्ष यान को नज़दीक आने पर उसे नष्ट कर सकते हैं. लेकिन इन खतरों को पार करते हुए NASA का पार्कर solar probe सूरज के सबसे नज़दीक जा पहुंचा है. मुझे दबाओ

Parker Solar Probe की सूर्य पर एंट्री

सूर्य का ऊपरी वातावरण जिसे corona कहा जाता है, उसमें अंतरिक्ष यान ने enter कर लिया है. यह हम इंसानों की एक बहुत ही बड़ी ऐतिहासिक जीत है, क्योंकि सूर्य के इतने नज़दीक जाने वाला यह पहला man made object है. सूरज हमारे सौरमंडल में ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है मगर कई लंबे सालों की research के बाद भी वैज्ञानिक सूरज के कई रहस्यों से पर्दा नहीं उठा पा रहे थे. सूर्य की चमक और उसके चारों ओर बना चुंबकीय क्षेत्र वैज्ञानिकों की पहुंच को सीमित कर देता है. मुझे दबाओ

Parker Solar Probe के बारे में कुछ खास बातें

पार्कर solar probe को सूरज का अध्ययन करने के लिए 12 August 2008 को launch किया था. और यह spacecraft 28 April 2021 को सूर्य के वातावरण के बाहरी हिस्से यानी corona में प्रवेश करता है. ये यात्रा वैसे तो बहुत छोटी थी. इसमें उसकी दूरी सूरज की सतह से मात्र 1.33 करोड़ kilometer थी. लेकिन यही वह पल था जब यह यान सूरज के सबसे करीब था. हालांकि इसने यह कारनामा 28 April 2021 को ही कर दिया था. लेकिन NASA के वैज्ञानिकों ने आंकड़ों के विश्लेषण के बाद ही में इसकी जानकारी साझा नहीं की है. जब यह अगली बार सूरज के नज़दीक जाएगा. तो सूरज करीब से गुजरेगा और इसी क्रम में दो हज़ार पच्चीस में यह यान सूर्य से 31.6 लाख kilometer की दूरी तक पहुंच जाएगा. और यह सूर्य से इसकी सर्वाधिक नज़दीकी दूरी होगी. सूर्य के आग उगलती दुनिया पर कदम रखने वाले इस पार्कर solar probe की लम्बाई 1 meter और ऊंचाई 2.5 meter हैं और चौड़ाई करीब 3 meter है. सूर्य का वायुमंडल जिसे corona भी कहा जाता है उसका तापमान लगभग ग्यारह लाख degree Celsius है. इतनी गर्मी कुछ ही second में पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी पदार्थों को पिघला सकती है. इसलिए वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष यान को सूरज की उबलती गर्मी से बचाने के लिए इसमें एक shield लगाई थी जो कि इन लाखों degree के तापमान में भी अंतरिक्ष यान को सूर्य के ताप से बचाने का काम करती है. पार्कर solar probe के ऊपर 4.5 inch मोटा carbon मिश्रित कवच लगाया गया है जो सूर्य के अधिक तापमान से इसकी सुरक्षा करता है साथ ही इसको shield fiber और ठोस carbon से तैयार किया गया है और इन में से सिर्फ दो ही ऐसे craft हैं जो बिना किसी सुरक्षा के space craft से चिपके हुए हैं. वैज्ञानिकों की मानें तो ये दोनों spacecraft सीधे तौर पर सूरज की गर्मी में थे और उनकी कोई भी सुरक्षा नहीं की जा सकती थी. जिसकी वजह से यह दोनों सूरज की गर्मी से पूरी तरह से लाल हो गए थे. वैज्ञानिकों ने इसे सूरज की गर्मी से बचाने के लिए उनका निर्माण टंगस्टन, Nileopium, molibdinam और नीलम जैसे कुछ गलनांग, धातुओं और पत्थरों से किया है. मुझे दबाओ

अब सवाल यह उठता है कि आखिर अंतरिक्ष यानसूरज पर जाकर क्या हासिल करना चाहता है?

दरअसल दोस्तों अंतरिक्ष यान तीन प्रमुख चीज़ों का अध्ययन करेगा. सूरज के बारे में सबसे हैरान कर देने वाली जो जानकारी है कि आखिर इसके बाहरी वातावरण का तापमान इसके center से ज़्यादा क्यों है? यही सवाल वैज्ञानिकों को कई सालों से परेशान कर रहा है. और खासतौर पर वैज्ञानिकों ने इसी सवाल के जवाब के लिए पार्कर को वहां पर भेजा है. एक और सवाल जो NASA के वैज्ञानिकों को उलझाए हुए हैं कि आखिर सूरज क्यों आग की लपटों को अंतरिक्ष में फ़ेंक रहा है और उससे भी हैरान कर देने वाले जो बात है वह यह है कि आग की लपटें जो सूरज के ऊपर उठ रही है और वापस सूरज के अंदर जाकर क्यों गिर रही है. यह वैज्ञानिकों के लिए बहुत ही बड़ी अनसुलझी पहली है लेकिन यही solar flair अगर तेज़ी से उठकर corona को पार कर लेती है और वे solar wind के रूप में पृथ्वी की तरफ आने लगती हैं तो क्या होगा? इसका भी वैज्ञानिक पता लगाना चाहते हैं. इन अध्ययन से हम धरती पर आने वाले सौर तूफानों के बारे में study करके उनसे बच सकते हैं और जब यह सूरज के करीब से गुज़र रहा था तो इसके बारे में NASA के वैज्ञानिकों ने बताया कि वह सबसे खतरनाक समय था, जब पार्कर पांच घंटे तक corona के अंदर बहुत तेज़ी से जा रहा था. और उस दौरान उसकी speed सौ kilometer प्रति second थी. उन्होंने बताया कि जितनी उम्मीद थी corona उससे ज़्यादा धूल से भरा हुआ था. भविष्य के corona के भ्रमण से वैज्ञानिकों को सूरज की उत्पत्ति को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी. वैज्ञानिकों ने कहा कि आगे यह भी पता लगाएंगे कि कैसे सूरज की रौशनी गर्म होती है क्योंकि सूरज के पास ठोस सतह नहीं होती है. इसलिए सूरज की बाहरी परत यानी corona धूल और गैसों से बनी हुई है. अगर Solar Probe अंतरिक्ष में चली जाए तो जीवन को भी खतरा हो सकता है.आपको क्या लगता है अगर हमारे सौर मंडल से सूरज अचानक गायब हो जाए, तो इसका असर हमारी पृथ्वी पर कैसा होगा? अपनी राय comment में ज़रूर बताएं. अगर आप अंतरिक्ष के खबर को पढ़ने में दिलचस्पी रखते हैं तो आप हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को जरूर ज्वाइन कर लीजिए मुझे दबाओ

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