अब उन सोने-चांदी के बर्तनों का क्या होगा जिसमें जी-20 के मेहमानों ने खाना खाया था?

जी-20 2023 का शिखर सम्मेलन 9 और 10 सितंबर को दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित हुआ, इस सम्मलेन में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन समेत दुनिया के तमाम बड़े नेता शामिल  हुए| दिल्ली स्थित प्रगति मैदान को जी-20 सम्मेलन के लिए पिछले लंबे समय से तैयार किया जा रहा था यहां के भव्य कन्वेंशन सेंटर भारत मंडपम में यह बड़ा समिट आयोजित हुआ इस दौरान मेहमानों के सिक्योरिटी से लेकर खाने-पीने तक के लिए कई खास इंतजाम किए गए थे अगर खाने पीने की बात करें तो रात्रि भोज में 400 से अधिक व्यंजन शामिल थे बात अगर खाने पीने की हो रही हो और बर्तन का नाम ना आए ऐसा हो नहीं सकता आपको बता दें कि रात्रि भोज में इन व्यंजनों को परोसने के लिए 15,000 सोने और चांदी के बर्तनों का उपयोग किया गया था जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ लेकिन अब सवाल यह है कि जी-20 खत्म होने के बाद इन सोने-चांदी के बर्तनों का क्या होगा?

क्या होगा इन बर्तनों का?

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सोशल मीडिया पर रात्रिभोज के कुछ फोटोस और वीडियोस जैसे ही प्रकाशित हुए, सोने-चांदी के इन बर्तनों ने खूब सुर्खियां बटोरी लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि इन बर्तनों का क्या किया जाएगा इसका जवाब जाने के लिए हमने आईटीपीओ(ITPO) के पीआरओ से बात की| आईटीपीओ (ITPO) के पीआरओ संजय वशिष्ठ ने हमें बताया कि फिलहाल इन्हें यहीं रखा गया है, आगे मंत्रालय की तरफ से जो भी निर्देश दिए जाएंगे उनके मुताबिक़ हम इनका इस्तेमाल करेंगे|

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि इन सोने-चांदी के बर्तनों का इस्तेमाल जी-20 की तरह आनेवाले किसी बड़े इवेंट में किया जा सकता है आपको बता दें कि जी-20 के दौरान यह सोने-चांदी के बर्तन खूब ट्रेंड में रहे थे सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे बहुत पसंद किया था और इस के वायरल होने के बाद इसपर राजनीति भी जमकर हुए|

चांदी के बर्तनों में खाना खाने के फायदे

आपको बता दें कि चांदी के बर्तन में खाना परोसना शुभ माना जाता है और यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में इन बर्तनों का प्रयोग सदियों से होता आया है चाहे घर में शादी समारोह हो या फिर कोई और दूसरा शुभ काम हमें चांदी के बर्तन किसी न किसी रूप में दिखी जाता है, वहीं अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोन से इन बर्तनों की बात करें तो इन बर्तनों में खाना खाने से शरीर निरोग रहता है वही ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि चांदी के बर्तन में खाना खाने से चंद्रमा और शुक्र मजबूत होता है 

कहां से खरीदा गया सोने-चांदी के इन बर्तनों को

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इन बर्तनों को बनाने की जिम्मेदारी जयपुर स्थित आईआरआईएस (IRIS)  मेटैलवेयर कंपनी को दी गई थी कंपनी ने बताया कि इन डिनर सेट को तैयार करने के लिए कंपनी को कर्नाटक, बंगाल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड के 200 कारीगर को काम पर लगाया गया था कंपनी का कहना है कि इन बर्तनों को बनाते समय भारतीय संस्कृति को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया| हर डिजाइन के पीछे एक सोच है साथ ही साथ इन बर्तनों में भारत की विविधता की झलक आपको देखने को मिलती है आपको बता दें कि इस पूरे समारोह के लिए 15,000 चांदी के बर्तनों का सेट तैयार किया गया था|

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