अभी छोड़ दो यह 10 काम नहीं तो कंगाल बनने में समय नहीं लगेगा: प्रेमानंद महाराज

प्रेमानंद जी महाराज कौन है यह बताने की जरूरत नहीं है पूरे भारत में उनकी पापुलैरिटी  किसी सेलिब्रिटी से भी अधिक है आए दिन उनसे मिले दुनिया के बड़े-बड़े लोग आते रहते हैं कभी विराट कोहली तो कभी कोई और, हाल ही में प्रेमानंद जी महाराज ने 10 ऐसे काम बताए हैं जिन्हें किसी व्यक्ति को नहीं करना चाहिए और अगर कोई ऐसा करता है तो उनके हिसाब से उसे बर्बाद होने में समय नहीं लगेगा| जीवन में इंसान धन दौलत पाने के लिए क्या कुछ नहीं करता लेकिन वह अपने जीवन में कुछ ऐसी छोटी-मोटी गलतियां कर देता है जिसके कारण उस की पूरी जीवन की कमाई मिनटों में खत्म हो जाती है आइए जानते हैं कि यह 10 काम क्या है जो प्रेमानंद जी महाराज ने बताएं हैं

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यह 10 गलती कभी मत करना वरना कंगाल बनने से कोई नहीं रोक पाएगा

premanand ji maharaj

  1. स्वयं की प्रशंसा: उन्होंने बताया कि जो इंसान स्वयं की प्रशंसा करता है उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है उसके द्वारा किए गए अच्छे कर्म भी नष्ट हो जाते हैं स्वयं की प्रशंसा करने वाला व्यक्ति बात-बात पर क्रोध  करता है ऐसे व्यक्ति के जीवन में कई समय ऐसा आता है जो उसे राजा से कंगाल बना देता है|
  2. लालच: लालच करने वाले व्यक्ति और झूठ बोलने वाले व्यक्ति के जीवन में सुख अधिक समय तक नहीं टिकता, यह दोनों ही काम इंसान के जीवन को नष्ट कर देता है और उसके जीवन में सुख शांति नष्ट हो जाती है|
  3. मन में द्वेष: अगर किसी ने आपका अपमान किया है और इससे अगर आप बहुत अधिक क्रोधित हो रहे हैं तो इसका बहुत बुरा असर आपके ऊपर ही पड़ता है अपमान का बदला क्रोध से नहीं बल्कि कर्म से लेना चाहिए,  इतिहास में कई ऐसे पल आए जब अपमान ने एक व्यक्ति को महान बना दिया और इसका सबसे अच्छा उदाहरण है ‘चाणक्य’ लेकिन अगर आप अपमान से क्रोधित होते हैं तो यह आपका ही सर्वनाश कर देगा|
  4. रक्षा ना करना: अगर कोई पशु पक्षी या मनुष्य ही आपके शरण में आए तो ऐसे जीव की रक्षा अवश्य करनी चाहिए ऐसा ना करने से व्यक्ति का पुण्य कर्म तुरंत ही नष्ट हो जाता है इसी लिए जो भी व्यक्ति आप की शरण में रक्षा की इच्छा से आए तो उसे बचाना आपका कर्तव्य होता है|
  5. उत्साह में पाप करना: अगर कोई व्यक्ति उत्साह में कोई गलत कार्य करता है या किसी से प्रेरित होकर कोई पाप करता है तो ऐसे व्यक्ति को ईश्वर कभी क्षमा नहीं करते और उन्हें पाप का भागी बनना ही पड़ता है ऐसे व्यक्ति के जीवन में सुख और शांति नष्ट हो जाती है|
  6. संभोग का चिंतन:  मन में पराई स्त्री के साथ संभोग करने की भावना रखने वाले पुरुष के जीवन में भी दरिद्रता आने में समय नहीं लगती, और ऐसे पुरुष के भी पुण्य कर्म लेकर तुरंत ही नष्ट हो जाते हैं|
  7. खुद को श्रेष्ठ मानने वाला: इसका सबसे अच्छा उदाहरण महाभारत है जहां दुर्योधन अपने आप को सबसे श्रेष्ठ योद्धा मानता है और उसका यही अहंकार ना केवल उसे बल्कि उसके पूरे परिवार को नष्ट कर देता है इसीलिए व्यक्ति को कभी भी खुद को श्रेष्ठ और दूसरों को कमजोर नहीं समझना चाहिए, हमारी जीवन में भी कई ऐसे पल आता है जब हम किसी व्यक्ति को कमजोर समझ रहे होते हैं लेकिन बाद में वही सबसे अच्छा प्रदर्शन करता है|
  8. दान:  कई बार व्यक्ति अपने जीवन में दान देने की बात कहकर बाद में मुकर जाता है या फिर कई बार दान देकर बाद में पश्चाताप करता है कि मैंने अधिक दान दे दिया ऐसे व्यक्ति के लिए भी महाराज जी कहते हैं कि उनका पुण्य कर्म नष्ट हो जाता है और उन्हें भी कंगाल बनते समय नहीं लगता|
  9. धन का संचय: महाराज जी आगे बताते हैं कि जो व्यक्ति अपने कमाए गए धन को अपने घरवालों की जरूरतों के लिए खर्च नहीं करता, वह अपने धन को अच्छे कार्य में नहीं लगाता और दाना भी नहीं करता  तो ऐसे व्यक्ति के लिए धन कमाना व्यर्थ है|
  10. दूसरों को नुकसान: आज व्यक्ति नाही अपनी खुशी से खुश है और ना ही अपने दुख से दुखी हैं  वह दूसरों की खुशी में दुखी है और दूसरे की समस्या से खुशी है महाराज जी कहते हैं कि जो व्यक्ति बच्चे, बुजुर्ग, स्त्री या असहाय लोगों को नुकसान पहुंचाने की बात करता है ऐसे लोगों की भी दुर्गति निश्चित है 

तो यह है प्रेमानंद जी महाराज के द्वारा बताए गए 10 ऐसे कर्म जो किसी भी व्यक्ति को नहीं करना चाहिए उम्मीद है कि आज का यह पोस्ट आपको पसंद आया होगा  इस तरह के और भी पोस्ट को पढ़ने के लिए और हमसे जुड़े रहने के लिये आप हमारे WhatsApp Group को ज्वाइन कर सकते हैं मुझे दबाओ

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