भरी दुनिया के सामने China ने India से मांगी दोस्ती की भीख, ये बोले Ajit Doval

भरी दुनिया के सामने China ने India से मांगी दोस्ती की भीख, ये बोले Ajit Doval

भारत के सामने दुनिया के कई शक्तिशाली देशों ने घुटने टेके तो चीन को समझ में आ गया कि कोई भी खेल बिना भारत के जीता नहीं जा सकता। अब चीन भारत में एंट्री करने के लिए व्याकुल है और इसके लिए भारत के NSA के सामने अब वो गिड़गिड़ाने लगा और कहने लगा हमे भी भारत में एंट्री दिला दीजिये। दरअसल, भारत ने चीन की दिग्गज इलेक्ट्रिक कार कंपनी के एक बिलियन डॉलर के ऑफर को ठुकराते हुए कह दिया था कि नहीं चाहिए तुम्हारी इलेक्ट्रिक कारें जाकर कोई और जगह देख लो। अब इस बीच दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की बैठक हो रही और इस सम्मेलन से इतर भारत के NSA अजीत डोभाल की चीन के वांग यी से मुलाकात की खबरें सामने आ गई। वांगी ने से दोनों देशों के बीच के रिश्तों को इस्थिर करने की बात कही। इसके जवाब में डोभाल ने भी दोनों देशों के आपसी हितों का जिक्र किया। यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब भारत ने चीन की कार निर्माता कंपनी BYD के एक अरब डॉलर वाले प्रोजेक्ट को ठुकरा दिया।

बता दें, चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से वांगी के बयान का रीड आउट जारी किया गया। से कहा ऐसी नीतियों को निर्धारित किया जाए जिससे आपसी भरोसे का निर्माण हो। साथ ही आपसी सहयोग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। दोनों पक्षों को दोनों राष्ट्रअध्यक्षों की तरफ से लिए गए रणनीति के निर्णय का पालन करना चाहिए। इसके तहत स्पष्ट किया गया है कि चीन और भारत कोई खतरा नहीं है बल्कि एक दूसरे के लिए विकास के अवसर प्रदान करते हैं। तो वहीं इसके जवाब में अजीत डोभाल ने कहा, भारत और चीन के व्यापक साझा हित हैं। दोनों पक्षों की नियति निकटता एक दूसरे से जुड़ी हुई है। ऐसे में रणनितिक आपसी विश्वास और पुनर्निर्माण करना और सामान्य विकास की तलाश करना जरूरी है। LAC पर परिस्थिति का समाधान खोजने के लिए भारत चीन के साथ काम करने को इच्छुक हैं। बता दें, डोभाल के इस बयान को अभी भारत की तरफ से जारी नहीं किया गया, लेकिन चीन के रीड आउट में इसका जिक्र है। अब अगर बात भारत ने चीन के कंपनी को एंट्री क्यों नहीं दी? इसे लेकर करें तो इस चीनी कंपनी यानी वेड मामले में मोदी सरकार ने भी कुछ यही मसला बताया और देखते ही देखते रिपोर्ट भी सामने आ गई।

रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए सीमा पार के प्लेयर्स को भारतीय बाजार से बाहर रखने के सरकार के रुख के मद्देनज़र चीनी कंपनियों के प्रवेश को लेकर गृह और विदेश मंत्रालय में बेचैनी है। बताया गया है कि कुछ मामलों में ये भी दिखाया कि स्थानीय कंपनियां डमी की तरह होती है और चीनी कंपनी को लेकर भी सरकार की यही चिंता है।और इसके चलते मोदी सरकार ने इसे खारिज कर दिया। खैर, चीन का खेल तो कोई नहीं समझ सकता, लेकिन भारत ने दिखा दिया है कि उससे पंगा लेना किसी भी देश के लिए कितना भारी पड़ सकता है। अब आपको क्या लगता है? जीस तरह से चीन भारत के सामने गिड़गिड़ा रहा, वो सही है और क्या भारत ने चीन को उसकी सही जगह दिखा दी है या फिर नहीं कमेंट कर जरूर बताएं।

 

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