Hyundai : रोटी के लिए 17-17 घंटे तक खेतों में कम किया और आज करोड़ों का मालिक है

मारुति सुजुकी के बाद भारत में सबसे ज्यादा कार बेचने वाली कंपनी “Hyundai’ को पता है किसने शुरू किया था एक साउथ कोरियन लड़का जिसका नाम है चुन जो यंग. बचपन में सिर्फ दो वक्त की रोटी के लिए 17-17 घंटे तक खेतों में कम किया अमीर बनने का सपना लिए कई बार घर छोड़कर भागा यहां तक की कई बार तो इसके बिजनेस आग लगने, बाढ़ आने और युद्ध की वजह से खत्म तक हो गए लेकिन फिर भी हार ना मानते हुए इसने दुनिया के सबसे बड़े कार कंपनियां में से एक Hyundai को बनाया 

कैसे एक खेत में काम करने वाले लड़के ने Hyundai बना दिया?

1915 में जब एक गरीब कोरियन फैमिली में चंद जो यूं का जन्म हुआ था उनके पिता एक किसान थे जो अपने 7 बच्चों का पेट पालने के लिए पूरे दिन खेतों में कम किया करते थे यूं तो चंद जो यंग का सपना पढ़ लिखकर एक टीचर बनाने का था लेकिन गरीबी इतनी थी की कई बार तो भूखे पेट ही सो जाना पड़ता था ऐसे में अच्छे शिक्षा लेना उनके लिए खूबसूरत सपना से ज्यादा कुछ भी नहीं था खराब आर्थिक स्थिति के चलते चंद अपने पिता के साथ दिन भर खेतों में ही कम करते हुए बिताते इसके अलावा कभी वह जानवरों को चराने का कम करते तो कभी लकड़िया काटकर उसे शहर बेचने लेकर जाते | लेकिन जब वो सिटी लाइफ को देखते थे तब उन्हें बहुत हैरानी होती थी साफ-सुथरे लोग, खूबसूरत कपड़े, अच्छे रोड और खाने की तो कोई कमी ही नहीं, इसने चंद को बहुत प्रभावित किया इसके बाद तो चंद कई बार अपने घर से भाग कर शहरों में चले गए जहां पर उन्होंने मजदूरी से लेकर अन्य छोटे-छोटे काम किया फिर कुछ समय के बाद उन्हें एक फैक्ट्री में जॉब मिल गई जहां पर चंद असिस्टेंट के तौर पर काम करने लगे लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद राइस स्टोर नाम की एक चावल की एक दुकान में अच्छे सैलरी पर डिलीवरी बाय की जॉब मिल गई और यहां से उनके लाइफ में पॉजिटिव बदलाव आना शुरू हुआ 

अब नौकर से मालिक बन गए चंद

कुछ ही दिनों में चंद डिलीवरी बॉय से मैनेजर बन गए फिर आया 1937 जब शॉप के मलिक बहुत बीमार पड़ गए और उनमें इतनी भी ताकत नहीं बच्ची थी की वो आगे के कामकाज को संभल सके ऐसे में उन्होंने अपना यह राइस स्टोर चंद के हाथों में सोप दिया इस तरह से सिर्फ 22 साल की उम्र में चंद अपनी मेहनत के दम पर स्टोर के नौकर से उसके मलिक बन गए लेकिन यह समय था वर्ल्ड वॉर का और इसी वर्ल्ड वॉर ने चंद के जीवन को बदल दिया और जापानी गवर्नमेंट चाहती थी की युद्ध के दौरान उनके सैनिकों को समय-समय पर जरूर के मुताबिक चावल मिलता रहे इसके लिए उन्होंने वहां की साड़ी दुकानों को अपने कब्जे में ले लिया था जिसमें की चंद जो यंग का दुकान भी शामिल था और अब वह निराश होकर घर लौट गए 

क्या हुआ विश्व युद्ध खत्म होने के बाद?

विश्व युद्ध खत्म होने के साथ ही चंद उसे स्थान पर दोबारा लौट गए थे जहां से उन्होंने शुरुआत की थी विश्व युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिकी सैनिक साउथ कोरिया में बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को बना रही थी और अब चंद भी धीरे-धीरे उनके साथ ही काम करने लग गए चंद मेहनती तो बचपन से ही थे उनके काम ने अमेरिकी सैनिकों का दिल जीत लिया और धीरे-धीरे उन्होंने चंद को बड़े-बड़े प्रोजेक्ट में काम करनेका मौका भी दिया और उसके बाद 1976 में चंद ने Hyundai मोटर कंपनी की शुरुआत की इसके एक साल बाद यानी 1968 में Hyundai ने फोर्ट के साथ पार्टनरशिप कर ली और उस शहर में छह महीने के अंदर एक बहुत बड़ा असेंबली प्लांट बनाकर तैयार कर दिया जो की आज भी दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल प्लांट है और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा हालांकि उन्हें समय-समय पर कई समस्याओं का सामना भी करना पड़ा लेकिन Hyundai दुनिया के टॉप 100 मोस्ट वैल्युएबल ब्रांड में शामिल हैं साथ ही ये टोयोटा और फॉक्स बैगन के बाद उत्पाद के मामले में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनी है जिसका बिजनेस 193 देश में फैला हुआ है पिछले साल Hyundai ने विश्व में 6.845 मिलियन यूनिट सेल की थी जिसमें से 8767 यूनिट तो सिर्फ इंडिया में बेचकर ही कंपनी ने एक नया रिकॉर्ड बना दिया था फिलहाल ये इंडिया में दूसरी सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनी है जो की महिंद्रा और टाटा जैसे स्वदेशी कंपनियां को भारी टक्कर देती है

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