Isro ने किया बड़ा धमाका, Chandrayaa-3 के बाद Gaganyaan ने पकड़ी रफ्तार !

Isro ने किया बड़ा धमाका, Chandrayaa-3 के बाद Gaganyaan ने पकड़ी रफ्तार !

Chandrayaa-3 के बाद Gaganyaan ने बजाया डंका, नासा भी है हैरान

चंद्रयान-3 की कामयाब उड़ान की बात भारत की गगनयान मिशन ने भी रफ्तार पकड़ ली और नौसेना की टीम ने ईस्टर्न नेवल कमांड में गगनयान के क्रू मॉड्यूल की रिकवरी का सफल ट्रायल किया। विशाखापट्टनम की समंदर में इस सफल परिषद से मिशन गगनयान का एक पायदान और ऊपर पहुँच गया। क्रू मॉडल किसी भी अंतरिक्ष यान का वो हिस्सा होता है जिसे बैठकर सभी ऐस्ट्रोनॉट धरती पर वापस लौटते हैं। ऐसे में बेहद जरूरी है कि क्रू मॉड्यूल सभी मान को पर खरा उतरे। अंतरिक्ष के किसी भी मिशन में एस्ट्रोनॉट्स की सुरक्षा सबसे अहम होती है। वापसी के दौरान क्रू मॉड्यूल जब धरती के वायुमंडल में दाखिल होता है तो उसे कुछ मिनटों तक बेहद कठिन दौर से गुजरना पड़ता है। वायुमंडल के रगड़ खाते हुए क्रू मॉड्यूल का तापमान बहुत ज्यादा हो जाता है। इस मॉड्यूल को समंदर में उतारने के लिए पैराशूट का सहारा लिया जाता है।

तैयारी इस बात की हैं की क्रू मॉड्यूल समंदर की लहरों से टकराकर सुरक्षित रहे और साथ ही साथ उफनती लहरें भी इस मॉड्यूल का कुछ न बिगाड़ पाए। विशाखापट्टनम में नौसेना और इसरो की टीम ने गगनयान के क्रू मॉड्यूल को बेहद कठिन परिस्थितियों में टेस्ट किया है। इस मुश्किल परीक्षा में गगनयान की क्रू मॉड्यूल ने अपनी काबिलियत और ताकत का प्रमाण दे दिया। इस मॉड्यूल में वापस लौटने वाले अंतरिक्षयात्री हर हाल में सुरक्षित रहेंगे। कुछ दिन पहले इसरो ने मिशन गगनयान में इस्तेमाल होने वाले प्रोफेशनल सिस्टम का भी सफल परीक्षण किया था। तमिलनाडु के महेंद्रगिरी में सर्विस मॉड्यूल के इस हॉटेस्ट में रॉकेट की इन जीनों को कुछ देर तक चलाकर देखा गया। इस परीक्षा में जांचा गया कि इस प्रपल्शन मॉड्यूल में किसी तरह की बाधा तो नहीं आ रही। 29 सेकंड तक चले इस टेस्ट में गगनयान की सर्विस मॉड्यूल प्रोफेशनल सिस्टम ने बेहतरीन परफॉर्मेंस दिखाएं।

गगनयान को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए जरूरी थर्ड इस रॉकेट इंजिन में मौजूद था। सर्विस मॉड्यूल गगनयान के कैप्सूल को ऑर्बिट में ले जाने में मदद करता है। इसके साथ ही धरती के चारों तरफ चक्कर लगाने में भी यही मॉड्यूल मदद करता है। मिशन गगनयान के तहत भारत तीन अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर उचाई पर धरती के कक्ष में पहुंचाएगा या अंतरिक्ष यात्री तीन दिनों तक अंतरिक्ष में ही रहेंगे और फिर समंदर में इनकी सुरक्षित वापसी कराई जाएगी। भारत के मिशन गगनयान पर पूरी दुनिया की नजरें टिक्की हुई है। इस मिशन की कामयाबी के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जो अपने दम पर अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट भेजने की काबिलियत रखते हैं।

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